:
Breaking News

Business News: जियो प्लेटफॉर्म्स IPO को पहले दिन जोरदार रिस्पॉन्स, 35 मिनट में पूरा सब्सक्राइब; GMP पर भी निवेशकों की नजर

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | जियो प्लेटफॉर्म्स IPO को पहले दिन संस्थागत निवेशकों से मजबूत मांग मिली। जानिए इश्यू का आकार, शेयर कीमत, आवेदन की अंतिम तारीख और ग्रे मार्केट प्रीमियम से जुड़ी जरूरी बातें।

मुंबई। देश के शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ ने पहले ही दिन निवेशकों का ध्यान खींचा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार कारोबार से जुड़ी इस कंपनी का सार्वजनिक निर्गम बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को खुला। शुरुआती कारोबार में संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते इश्यू लगभग 35 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इससे बाजार में इस आईपीओ को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, शुरुआती मांग को भविष्य में शेयर के प्रदर्शन या मुनाफे की गारंटी नहीं माना जा सकता। <Cite refs={["turn748988search6","turn748988search12"]}/>


₹30 हजार करोड़ से बड़ा इश्यू, 23 अक्टूबर तक आवेदन


जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश के लिए 21 से 23 अक्टूबर तक बोली लगाई जा सकती है। कंपनी ने प्रति शेयर कीमत का दायरा ₹1,065 से ₹1,119 निर्धारित किया है। इस इश्यू के जरिए करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना है। इसके तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जा रहे हैं। <Cite refs={["turn748988search2","turn748988search7"]}/>


आईपीओ का प्राइस बैंड और आकार इसे भारतीय प्राथमिक बाजार के बड़े निर्गमों में शामिल करता है। निवेशकों के लिए केवल इश्यू के आकार और शुरुआती मांग को देखना पर्याप्त नहीं है; कंपनी का मूल्यांकन, कारोबार की संभावनाएं और निवेश से जुड़े जोखिम भी समझना जरूरी है।


पहले दिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग


बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:34 बजे तक आईपीओ करीब 1.01 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। इस दौरान पात्र संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी में मांग आरक्षित हिस्से की लगभग 3.25 गुना रही।


इसके विपरीत, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी में शुरुआती सब्सक्रिप्शन करीब 26 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों की श्रेणी में लगभग 23 प्रतिशत था। ये आंकड़े संबंधित समय की स्थिति दर्शाते हैं; बोली की अवधि समाप्त होने तक इनमें बदलाव संभव है। <Cite refs={["turn748988search6","turn748988search1"]}/>


इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती चरण में संस्थागत निवेशकों ने इश्यू में प्रमुख भूमिका निभाई। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन के आंकड़े ही पूरी अवधि की मांग का सही आकलन देंगे।


ग्रे मार्केट में ₹265 के प्रीमियम की चर्चा


आईपीओ के साथ ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP भी चर्चा में है। 21 अक्टूबर की सुबह उपलब्ध बाजार अपडेट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर का GMP करीब ₹265 बताया गया। ₹1,119 के ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले यह लगभग 23.7 प्रतिशत के संभावित प्रीमियम के बराबर है। <Cite refs={["turn748988search1","turn748988search6"]}/>


हालांकि, ग्रे मार्केट अनौपचारिक बाजार है। वहां मिलने वाला प्रीमियम तेजी से बदल सकता है और इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भी इसी कीमत पर कारोबार करेगा। वास्तविक लिस्टिंग मूल्य बाजार की परिस्थितियों, मांग और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगा।


इसलिए केवल GMP देखकर आवेदन करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, इश्यू का मूल्यांकन और अपने जोखिम सहने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।


एक लॉट के लिए कितनी रकम चाहिए?


जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं। ऊपरी प्राइस बैंड ₹1,119 के आधार पर एक लॉट के लिए ₹13,428 की राशि चाहिए। इसके बाद आवेदन 12 शेयरों के गुणक में किया जा सकता है। <Cite refs={["turn748988search1","turn748988search3"]}/>


निवेश करने से पहले आवेदन की श्रेणी, अपने डीमैट खाते की जानकारी और भुगतान संबंधी विवरण जांच लेना चाहिए। आईपीओ में आवेदन करने से शेयरों का आवंटन सुनिश्चित नहीं होता।


कर्मचारियों और रिलायंस के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सा


इस इश्यू में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ और जियो प्लेटफॉर्म्स के पात्र कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ का हिस्सा आरक्षित रखा गया है। पात्र कर्मचारियों को अंतिम इश्यू मूल्य पर प्रति शेयर ₹54 की छूट देने की व्यवस्था बताई गई है। <Cite refs={["turn748988search2","turn748988search8"]}/>


इसके अतिरिक्त, इश्यू में पात्र संस्थागत खरीदारों, खुदरा निवेशकों और गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए अलग-अलग आवंटन श्रेणियां निर्धारित हैं। संबंधित श्रेणी में आवेदन करने से पहले पात्रता और आधिकारिक निर्गम दस्तावेजों की शर्तें देखना जरूरी है।


सिर्फ टेलीकॉम नहीं, डिजिटल सेवाओं का भी बड़ा कारोबार


जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर डिजिटल सेवाओं और तकनीक तक फैला है। इसकी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराती है। जियोफाइबर और जियो एयरफाइबर के जरिए कंपनी घरों तथा व्यवसायों को इंटरनेट कनेक्टिविटी भी देती है।


इसके डिजिटल इकोसिस्टम में मनोरंजन, संगीत, गेमिंग, क्लाउड और व्यवसायों के लिए तकनीकी समाधान शामिल हैं। कंपनी नेटवर्क तकनीक, क्लाउड प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं के विकास पर भी काम कर रही है। <Cite refs={["turn566556search1","turn566556search4"]}/>


जियो की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ग्राहक आधार की संख्या 52.44 करोड़ थी। कंपनी के बड़े ग्राहक आधार और डिजिटल नेटवर्क को उसके कारोबार के प्रमुख पहलुओं में गिना जाता है। <Cite refs={["turn566556search1"]}/>


5G नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में मजबूत स्थिति


दूरसंचार कारोबार में स्पेक्ट्रम और नेटवर्क क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्पेक्ट्रम उन रेडियो फ्रीक्वेंसी का समूह है, जिनके जरिए मोबाइल नेटवर्क पर कॉल और डेटा सेवाएं संचालित होती हैं।


जियो के पास 700 मेगाहर्ट्ज, 3,300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज जैसे बैंड में 5G स्पेक्ट्रम है। कम आवृत्ति वाला 700 मेगाहर्ट्ज बैंड व्यापक कवरेज और इमारतों के भीतर कनेक्टिविटी में मदद कर सकता है, जबकि अन्य बैंड अलग-अलग जरूरतों के अनुसार नेटवर्क क्षमता और डेटा सेवाओं को सहारा देते हैं।


कंपनी की तकनीकी क्षमता और ग्राहक आधार उसके कारोबार के विस्तार में अहम हो सकते हैं। फिर भी, भविष्य की वृद्धि प्रतिस्पर्धा, निवेश लागत, ग्राहक खर्च और दूरसंचार क्षेत्र के नियामकीय माहौल जैसे कारकों से प्रभावित होगी।


निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?


जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में शुरुआती मांग मजबूत दिखाई दी है, लेकिन किसी भी आईपीओ में निवेश का निर्णय केवल सब्सक्रिप्शन या ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर नहीं लेना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन, कारोबार की वृद्धि, प्रतिस्पर्धा और आधिकारिक रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में बताए गए जोखिमों की समीक्षा करनी चाहिए।


निष्कर्ष: जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल है। पहले दिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग और GMP की चर्चा ने इसे सुर्खियों में ला दिया है। अब निवेशकों की नजर बोली अवधि के अंतिम आंकड़ों और शेयर की संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। लेकिन संभावित लाभ निश्चित नहीं है और निवेश में नुकसान का जोखिम बना रहता है।


यह भी पढ़ें


शेयर बाजार, कंपनियों के आईपीओ और कारोबार से जुड़ी अन्य खबरों के लिए Alam Ki Khabar पढ़ते रहें।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *